Short Story19241 min read

Sawa Ser Gehun

सवा सेर गेहूं

Sawa Ser Gehun (सवा सेर गेहूं) by Premchand shows how a loan of 1.25 seers of wheat enslaves farmer Shankar's family for generations.

Characters:Shankar, Pandit Udaybhan
Setting:Rural India, moneylender's house

शंकर एक गरीब किसान था। उसकी फसल खराब हो गई थी और घर में अनाज नहीं था। उसने महाजन से सवा सेर गेहूं उधार लिया।

कर्ज़ का जाल

महाजन ने कहा - ब्याज लगेगा। फसल आने पर दो सेर वापस करना।

फसल आई तो शंकर ने दो सेर दिए। लेकिन महाजन ने कहा - देर हो गई, ब्याज बढ़ गया। अब तीन सेर देना होगा।

पीढ़ी दर पीढ़ी

शंकर देता गया, कर्ज़ बढ़ता गया। वह मर गया, कर्ज़ बेटे पर आया। बेटा मरा, पोते पर आया।

सवा सेर गेहूं से शुरू हुआ कर्ज़ तीन पीढ़ियों तक चलता रहा।

अंत

आखिर शंकर के पोते ने अपनी सारी ज़मीन महाजन को दे दी। तब जाकर कर्ज़ खत्म हुआ।

एक छोटा सा कर्ज़, और पूरा परिवार बर्बाद।

ब्याज का चक्र गरीब को कभी छोड़ता नहीं।