रामलाल ने लॉटरी का टिकट खरीदा था। इनाम था एक लाख रुपये। उस दिन से उसकी ज़िंदगी बदल गई - सपनों में।
सपने
रामलाल सोचता - जीत जाऊंगा तो पक्का मकान बनवाऊंगा, गाड़ी लूंगा, बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाऊंगा।
उसकी पत्नी भी सपने देखने लगी - गहने बनवाऊंगी, नई साड़ियां लूंगी। पड़ोसियों को दिखाऊंगी।
रिश्तेदार
जब गांव में खबर फैली कि रामलाल ने लॉटरी का टिकट लिया है, तो रिश्तेदार आने लगे। सब याद करने लगे कि कभी उन्होंने रामलाल की मदद की थी।
दूर के रिश्तेदार भी करीबी हो गए। हर कोई हिस्सा मांगने लगा।
नतीजा
जब नतीजा आया तो रामलाल का नंबर नहीं था। सारे रिश्तेदार गायब हो गए। लेकिन रामलाल को एक सबक मिला।
लॉटरी ने जीतने से पहले ही दिखा दिया कि कौन अपना है।